आस्था का प्रतीक: गदरपुर की धरा पर इतिहास के एक और स्वर्णिम अध्याय का हुआ शुभारंभ -अनाज मंडी की श्री रामलीला अपने गौरवशाली 71वें वर्ष में प्रवेश
विनोद वार्ता संवाद-सूत्र
गदरपुर। गदरपुर की धरा पर इतिहास के एक और स्वर्णिम अध्याय का शुभारंभ हुआ। अनाज मंडी की श्री रामलीला अपने गौरवशाली 71वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह केवल एक मंचन नहीं, यह 70 वर्षों की आस्था, परंपरा और मर्यादा का उत्सव है। वर्ष 1955 से प्रारंभ हुई यह रामलीला आज केवल गदरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। हमारे बुजुर्गों ने जिस नींव को अपने अथक परिश्रम और प्रभु श्री राम के प्रति अगाध श्रद्धा से रखा था, आज वही बरगद का विशाल वृक्ष बनकर हम सभी को अपनी छाया में एकता के सूत्र में बांधे हुए है। 71 वर्षों की यह यात्रा अनेक उतार-चढ़ावों की साक्षी रही है। मंच वही है, मर्यादा वही है, और प्रभु का चरित्र भी वही है, पर हर वर्ष कलाकारों के भाव नए होते हैं। यहाँ व्यापार और व्यवहार से ऊपर उठकर सभी आढ़ती भाई, व्यापारी बंधु और नगरवासी एक परिवार की भांति सेवा में जुट जाते हैं। यही इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता है। रामलीला हमें केवल मनोरंजन नहीं देती, वह हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। पिता के प्रति राम का प्रेम, भाई के प्रति भरत का त्याग, मित्रता में सुग्रीव और हनुमान का समर्पण, और सत्य के लिए रावण से युद्ध करने का साहस - यही तो हमारी संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। 71वें वर्ष के शुभारंभ पर हम प्रभु श्री राम से प्रार्थना करते हैं कि वे इसी प्रकार हम सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें और यह अनवरत चलने वाला धर्म-यज्ञ ऐसे ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहे। आइए, इस वर्ष भी हम सभी एकजुट होकर इस आयोजन को सफल बनाएं और मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।





