सत्यमेव जयते

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आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लिए ज्ञान और संतुलन का मंत्र ग्राफिक्स से समझिए धामी सरकार का बजट

देहरादून (संवाद-सूत्र) । धामी सरकार ने गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान बजट पेश किया। सरकार ने नई सोच, नवाचार, अवस्थापना विकास के साथ अलग-अलग वर्गों के लिए किए गए प्रावधान को संतुलन से परिभाषित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 111703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बजट के आकार में 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। बजट में सरकार ने आत्मनिर्भर व विकसित उत्तराखंड के संकल्प को पूरा करने के लिए ज्ञान व संतुलन का मंत्र दिया। यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में वित्त मंत्री के रूप में अपनी सरकार का बजट पेश किया। उन्होंने करीब सवा घंटे के बजट भाषण में विकसित उत्तराखंड के संकल्प को दोहराया। कहा, यह संकल्प ज्ञान व संतुलन के मंत्र से पूरा होगा। धामी सरकार के बजट में क्या खास है ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं... यह कामों का लेखा-जोखा नहीं भविष्य का रोड मैप है, बजट के बाद बोले सीएम धामी सरकार को नए वित्तीय वर्ष में 111703.21 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इसमें 67525.77 करोड़ राजस्व प्राप्तियों व 42617.35 करोड़ पूंजीगत प्राप्तियों का योगदान शामिल होगा। कर मुक्त बजट में राजस्व घाटे का अनुमान नहीं है। वहीं, 12579.70 करोड़ राजकोषीय घाटा होने का अनुमान लगाया गया है। धामी सरकारक इस बजट से महिला कल्याण की योजनाएं परवान चढ़ेंगी। सरकार ने इस वर्ष भी जेंडर बजट बढ़ाया है। पिछले साल इसमें 2423 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी। इस साल इस साल पिछले साल से 2730  सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति और तकनीकी विकास से जुड़े प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़, सीएम पलायन रोकथाम योजना के लिए 10 करोड़, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए 62.29 करोड़, गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता अनुदान के लिए 155.38 करोड़, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के लिए 10 करोड़ एवं उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के लिए 3.34 करोड़ की व्यवस्था की है। सरकार ने बजट में अन्नदाताओं के लिए भी कई योजनाओं में अच्छे खासे बजट की व्यवस्था की है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए 39.90 करोड़, मोटा अनाज मिशन योजना के प्रोत्साहन के लिए 12 करोड़, स्थानीय फसलों को प्रोत्साहित कार्यक्रम के लिए 5.75 करोड़, किसान पेंशन योजना के लिए 12.6 करोड़, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 160.13 करोड़, दुग्ध मूल्या प्रोत्साहन योजना के तहत 32 करोड़ की व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड में सबको कैशलेस और बेहतर इलाज मिलेगा। बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए 4252 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अटल आयुष्मान योजना का बजट सरकार ने 560 करोड़ से बढ़ाकर 600 करोड़ कर दिया है। शहरों में पर्यटन सीजन में विशेषकर जाम मुसीबत है। इससे छुटकारे के लिए 196 वाहन पार्किंग स्थलों का चयन किया गया है। इसमें 66 सरफेस पार्किंग, 112 मल्टी लेवल कार पार्किंग, 09 ऑटोमेटेड कार पार्किंग और नौ टनल पार्किंग चिह्नित हैं। बजट में अवैध खनन, एआई, साइबर सुरक्षा से लेकर खनन सर्विलांस , आईटी सेवाओं के विस्तार, अगले साल होने वाले कुंभ के लिए प्रावधान है। उत्तराखंड का आम बजटरू किसी ने सराहा तो किसी ने बताया निराशाजनक सरकार में नई सोच, नवाचार, अवस्थापना विकास के साथ अलग-अलग वर्गों के लिए किए गए प्रावधान को संतुलन से परिभाषित किया है। संतुलन यानी समावेशी विकास, आत्मनिर्भर, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव व शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति, न्यायपूर्ण व्यवस्था पर बजट में प्राथमिकता दी गई है।

प्रदेश अध्यक्ष मिलने आए, राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने पहुंचे विधायक पांडेय

ऊधम सिंह नगर (संवाद-सूत्र)। विधायक पांडेय की राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। विगत दिनों प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनके आवास संतोष नगर गूलरभोज में पहुंच कर चर्चा की थी। इसके अगले दिन विधायक ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भेंट की। भारतीय जनता पार्टी के भीतर संगठनात्मक सक्रियता के बीच विधायक अरविंद पांडेय की राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। विगत बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनके घर पहुंच कर चर्चा की थी। इसके अगले ही दिन विधायक पांडेय ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भेंट की। यह मुलाकात वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद विधायक पांडेय ने कहा कि पार्टी संगठन पूरी तरह से एकजुट है और प्रदेश में तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक उपहार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इधर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के साथ यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं है बल्कि यह संगठनात्मक मजबूती, चुनावी प्रबंधन और स्थानीय समीकरणों को साधने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। लगातार हो रही इन बैठकों से यह संकेत मिल रहा है कि भाजपा नेतृत्व जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाकर मिशन 2027 को सफल बनाने की दिशा में अग्रसर है। यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से विधायक पांडेय विभिन्न मुद्दों पर अपनी सरकार और नौकरशाही पर खुलकर हमलावर रहे थे। ऐसे में इन शीर्ष स्तरीय मुलाकातों को विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी के किसी भी संभावित नकारात्मक प्रभाव को कम करने (डैमेज कंट्रोल) की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में भी देखा जा रहा है।

महामहिम श्री राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पंतनगर विश्वविद्यालय में 04 दिवसीय उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का दीप प्रज्ज्वलित कर व मशाल प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया


पंतनगर (सू.वि.)। महामहिम श्री राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पंतनगर विश्वविद्यालय में 04 दिवसीय उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का दीप प्रज्ज्वलित कर व मशाल प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। महामहिम राज्यपाल ने 800 मीटर पुरुष, महिला वर्ग रेस के विजेताओं को मेडल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। 800 मीटर रेस पुरुष वर्ग में एस एस जे अल्मोड़ा के अंकित नाथ प्रथम,श्रीदेव सुमन टिहरी गढ़वाल के आसिफ द्वितीय, एसएस जे अल्मोड़ा के ललित सिंह तृतीय स्थान पर रहे जबकि महिला वर्ग 800 मी0 रेस में कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल की नीतू प्रथम,संस्कृति वि वि हरिद्वार की चांदनी द्वितीय व एसएस जे अल्मोड़ा की शीतल भट्ट तृतीय स्थान पर रही। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल ने कहा उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव के उद्घाटन समारोह में आप सभी प्रिय छात्र-छात्राओं और देवभूमि उत्तराखंड की उज्ज्वल युवा शक्ति के मध्य उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और आत्मगौरव का विषय है। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाशक्ति, अनुशासन, संकल्प और राष्ट्रभावना का उत्सव है। उन्होंने कहा उत्तराखंड को हम देवभूमि कहते हैं यह आस्था की भूमि है, तप की भूमि है, त्याग और पराक्रम की भूमि है। परंतु आज मैं इसे युवाशक्ति की भूमि के रूप में देख रहा हूँ। हिमालय की ऊँचाइयाँ हमें ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा हमारी मूल भावना है,कृ“राष्ट्र सर्वोपरि”। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन हैं। मैदान में जो अनुशासन, समर्पण और टीम भावना विकसित होती है, वही आगे चलकर राष्ट्र प्रथम की चेतना को सुदृढ़ करती है। जब कोई खिलाड़ी मैदान में उतरता है, तो वह केवल स्वयं का नहीं, बल्कि अपने राज्य और अपने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। विश्वविद्यालय जीवन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा और खेलकृदोनों का संतुलित विकास ही संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में उत्कृष्ट है और खेल में सक्रिय है, वही आत्मविश्वासी, संतुलित और नेतृत्व क्षमता से युक्त नागरिक बनता है। महामहिम ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समग्र विकास करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि खेल और सह-पाठ्य गतिविधियों को मुख्यधारा में स्थान देकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह महोत्सव उसी भावना का सशक्त उदाहरण है। महामहिम राज्यपाल ने कहा “फिट युवा, सशक्त भारत” का संकल्प तभी साकार होगा जब हमारे विश्वविद्यालय खेलों को प्राथमिकता देंगे। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में फिट  इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने देश में जनभागीदारी से खेल संस्कृति को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा जो युवा खेल के मैदान में पसीना बहाता है, वह जीवन में कभी गलत दिशा की ओर नहीं जाता। आज समाज के समक्ष एक बड़ी चुनौती नशे की प्रवृत्ति है। युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम खेल है। खेल ऊर्जा देता है, आत्मविश्वास देता है और जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाता है। महामहिम ने कहा आज हमारे बीच बड़ी संख्या में महिला खिलाड़ी भी भाग ले रही हैं। यह अत्यंत हर्ष का विषय है। “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” केवल एक विचार नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आधार है। जब बेटियाँ खेल में आगे बढ़ती हैं, तब समाज की सोच नहीं, राष्ट्र की दिशा बदलती है।

पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज उत्तराखंड न सिर्फ विकास के नए आयाम गढ़ रहा है

रुद्रपुर। पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज उत्तराखंड न सिर्फ विकास के नए आयाम गढ़ रहा है, बल्कि स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। इसी दिशा में जिला प्रशासन, ऊधम सिंह नगर द्वारा रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित सरस आजीविका मेला-2026 आत्मनिर्भर भारत की भावना को जमीन पर साकार करता हुआ नजर आ रहा है। इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों ने अपने पारंपरिक उत्पादों के साथ स्टॉल लगाए हैं, जो न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता का परिचय दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों और महिलाओं को अपनी आय बढ़ाने का सशक्त मंच भी प्रदान कर रहे हैं। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि धामी सरकार की नीतियाँ अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि धरातल पर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद के हरिपुरधार स्थित ग्राम पंचायत दिउड़ी खड़ाह से आई जय बिजाई माता स्वयं सहायता समूह ने अपने स्टॉल के माध्यम से हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध से मेले में आए लोगों को आकर्षित किया। समूह की सदस्य सोनू राणा द्वारा प्रस्तुत स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि उनका स्टॉल मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। सोनू राणा ने इस मंच के लिए उत्तराखंड सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल छोटे समूहों को पहचान मिलती है, बल्कि उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने के लिए व्यापक अवसर भी प्राप्त होते हैं। उन्होंने मेले में मिले सकारात्मक माहौल और बेहतर व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि यह सब राज्य सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियों का ही परिणाम है। वास्तव में, सरस आजीविका मेला-2026 जैसे आयोजन इस बात के जीवंत उदाहरण हैं कि धामी सरकार का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है। यह पहल महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नई उम्मीद और आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनती जा रही है।
 

हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर की जा रही कथित पत्रकारिता को लेकर सख्त टिप्पणी की

नैनीताल (सू.वि.)। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर की जा रही कथित पत्रकारिता को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि पत्रकारिता के नाम पर की जाने वाली गतिविधियों को तय आचार संहिता (Code of Ethics) का पालन करना होगा, अन्यथा संबंधित व्यक्ति कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने हिमांशु ठाकुर बनाम राज्य सरकार व अन्य (रिट याचिका (क्रिमिनल) संख्या 249/2026) की सुनवाई के दौरान की। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक ‘मीडिया बाइट’ के कारण शिकायतकर्ता (प्रतिवादी संख्या-3) की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। शिकायतकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि उक्त मीडिया बाइट के बाद उन्हें लगातार व्हाट्सएप संदेश मिल रहे हैं और विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है, जबकि मूल शिकायत बाद में वापस ले ली गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि अब संबंधित मीडिया बाइट को सोशल मीडिया से हटा दिया गया है। इस दौरान अदालत के समक्ष वर्ष 2021 की वह अधिसूचना भी रखी गई, जिसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 87(2) के अंतर्गत बनाए गए आईटी (इंटरमीडियरी गाइड लाइंस) नियम, 2011 और बाद के डिजिटल मीडिया से जुड़े नियमों का हवाला दिया गया। कोर्ट ने विशेष रूप से नियम-9 (रुल 9) का उल्लेख किया, जिसमें साफ कहा गया है कि कोई भी डिजिटल मीडिया प्रकाशक भारत में तय कोड ऑफ एथिक्स का पालन करने के लिए बाध्य है।

यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक, लोकतंत्र की जीत संविधान की कसौटी पर सरकार, राहुल गांधी की चेतावनियां हुईं प्रासंगिक: डा. गणेश उपाध्याय  -यूजीसी को लेकर उठे राष्ट्रीय स्तर के सवालों पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णायक हस्तक्षेप

विनोद वार्ता संवाद-सूत्र
उत्तराखंड।
यूजीसी से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ताजा आदेश को लोकतंत्र और संविधान की विजय बताते हुए उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता एवं पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि यह फैसला संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और देश की शिक्षा प्रणाली की रक्षा की दिशा में मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय का हस्तक्षेप इस बात का स्पष्ट संकेत है कि किसी भी सरकार को संविधान की सीमाओं के भीतर रहकर ही निर्णय लेने होंगे। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस नेता, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी लगातार यह चेतावनी देते आए हैं कि बीते 11 वर्षों में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करने की प्रवृत्ति देखने को मिली है। यूजीसी को लेकर आया सर्वोच्च न्यायालय का आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि संविधान से ऊपर कोई सत्ता नहीं है और संस्थागत संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, युवाओं के भविष्य और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषयों पर राहुल गांधी द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं आज और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय सरकार को पुनः संविधान के प्रति जवाबदेह बनाता है और यह स्पष्ट करता है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर एकतरफा निर्णय स्वीकार्य नहीं हो सकते। कांग्रेस प्रवक्ता ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। यदि केंद्र सरकार इस आदेश की भावना को समझते हुए संवैधानिक मूल्यों और जनआकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करती है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करेगा। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस यूजीसी सहित शिक्षा से जुड़े सभी मुद्दों पर छात्रों, शिक्षकों और देशहित के साथ मजबूती से खड़ी है और संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में जिम्मेदार और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
 

देहरादून परेड ग्राउंड में राज्यपाल ने परेड की सलामी, निकाली गई कईं झांकियां

देहरादून (संवाद-सूत्र)। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर देहरादून के परेड मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान सीएम सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। इसके साथ ही समारोह में विभिन्न विभागों की झाकियां भी निकली गईं। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने गणतंत्र दिवस की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं को नमन किया है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप संस्कृति, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और सैन्य शक्ति के क्षेत्र में भारत ने विश्व मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति यात्रा में देवभूमि उत्तराखंड भी पूरे सामर्थ्य से सहभागी बना है। राज्य में आधारभूत ढांचे, सड़क, रेल, एयर कनेक्टिविटी, डिजिटल सेवाओं और निवेश के क्षेत्र में शानदार कार्य हुए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से प्रदेश आज तेजी से विकास के नए आयाम छू रहा है। राज्यपाल ने कहा कि योग और आयुर्वेद राज्य की आत्मा हैं। राज्य को योग-भूमि और वेलनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। देवभूमि उत्तराखंड को हमने अध्यात्म का वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प लिया है। कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति और हमारी बेटियां शिक्षा, सेना और खेल के मैदान से लेकर उद्यमिता तक, हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। यूसीसी के माध्यम से उत्तराखंड ने अपनी माताओं, बहनों और बेटियों को सुरक्षा और समानता का कानूनी कवच दिया है। प्रदेश में तकनीक का उपयोग प्रशासनिक पारदर्शिता, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में तेजी से बढ़ रहा है। वही मुख्यमंत्री धामी ने आवासीय परिसर में फहराया ध्वज, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं एवं राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान के निर्माण का महापर्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर हमें स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने तथा अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान के उद्देश्यों के अनुरूप न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूलभूत लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहे। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को साकार करने व देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस प्रेरणादायी कथन से प्रदेशवासियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है। राज्य सरकार ने जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार का उद्देश्य है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड ने देश के अन्य राज्यों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बनाए रखने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। तीर्थ यात्राओं के बेहतर प्रबंधन के साथ तीर्थाटन से जुड़ी स्तरीय अवस्थापना सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। कुमाऊं मंडल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने एवं आर्थिक सुदृढ़ता के उद्देश्य से शीतकालीन यात्रा की भी शुरुआत की गई है। राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधारों के साथ उद्योग-अनुकूल वातावरण का सृजन किया जा रहा है। नीति आयोग की निर्यात तैयारी सूचकांक में उत्तराखण्ड को छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।