सूबे मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने सभी जिलाधिकारियों की वर्चुअल बैठक ली
रूद्रपुर (सू.वि.)। सूबे मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने सभी जिलाधिकारियों की वर्चुअल बैठक लेते हुए कह कि राज्य में ग्रीष्म ऋतु के दौरान उच्च तापमान एवं शुष्क परिस्थितियों के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो जन-जीवन एवं आधारभूत सेवाओं को प्रभावित करती हैं। इस अवधि में पेयजल स्रोतों में कमी आने से जल संकट की स्थिति बन जाती है, जबकि विद्युत की मांग में वृद्धि से आपूर्ति तंत्र पर दबाव बढ़ता है। सूखेपन के कारण वनाग्नि की घटनाओं में भी वृद्धि होती है, जिससे वन संपदा एवं पर्यावरण को क्षति पहुंचती है। इसके अतिरिक्त शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आगजनी की घटनाएं, पेयजल आपूर्ति में व्यवधान तथा अन्य मौसमी चुनौतियां भी सामने आती हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इसके अतिरिक्त मैदानी जनपदों में हीट वेव की स्थिति विशेष रूप से जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न करती है। अत्यधिक तापमान के कारण लू लगने, डिहाइड्रेशन एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है तथा समय पर राहत एवं बचाव उपायों की आवश्यकता बढ़ जाती है। अतः हीट वेव के प्रभावी प्रबंधन हेतु पूर्व चेतावनी, जनजागरूकता एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु तैयारी के संबंध में जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उन्होने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में दवाइयां, एंबुलेंस, मेडिकल टीम तैयार करने, गर्भवती महिलाओं का डाटा एकत्रित करने तथा सर्पदंस एंटी वेनम किट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला चिकित्सालय में पर्याप्त रूप से रखे जाने, ग्रीष्म ऋतु की स्थिति में शिक्षण एवं पठन-पठान की समय अवधि में परिवर्तन किए जाने, ग्रीष्म ऋतु से संबंधित जानकारी का प्रचार प्रसार किया जाने हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गये है। उन्होने बताया कि जल संस्थान और पेयजल विभाग को पेयजल लाइनों की मरम्मत कर शुद्ध पेयजल आपूर्ति किये जाने, खराब हैंडपंप आदि की समय पर मरम्मत करने के साथ ही पेयजल समस्या क्षेत्रों में सुचारू पेयजल हेतु वैकल्पिक व्यवस्था रखने के निर्देश दिये गये है। उन्होने विद्युत विभाग को निर्देश दिए कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान सुचारू विद्युत आपूर्ति हेतु विद्युत उकरणों की व्यवस्थाएं रखने, निगर निकायों, बस अण्डो, चिकित्सालयों, निर्माण कार्य स्थलों में पर्याप्त प्याऊ, पेयजल,सेड आदि व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये है। उन्होने कहा कि वनाग्नि पर प्रभावी रोक-थाम हेतु समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश प्रभागीय वनाधिकारियों को निर्देश दिये गये है। उन्होने बताया कि ग्रीष्मकाल हेतु आपदा प्रबंधन कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमाशंकर नेगी आदि मौजूद थे।






