सत्यमेव जयते

उधम सिंह नगरक्राइम

गदरपुर पुलिस अवैध हथियार सहित एक को किया गिरफ्तार -एक तमंचा 12 बोर व एक कारतूस जिन्दा 12 बोर बरामद किया गया

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(पुलिस एंड मीडिया गदरपुर)
गदरपुर।
पुलिस ने अवैध शस्त्र/हथियार रखने वालों के खिलाफ ऑप्रेशन प्रहार अभियान के तहत कठोर कार्यवाही करते हुए एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक तमन्चा 12 बोर व 01 जिन्दा कारतूस 12 बोर बरामद किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद उधम सिह नगर द्वारा वर्तमान में संदिग्ध व्यक्तियों व अवैध शस्त्र/हथियार रखने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही हेतु चलाये गये अभियान ऑपरेशन प्रहार के तहत दिशा निर्देश  दिये गये थे। उपरोक्त आदेश निर्देशों के क्रम में श्रीमान् पुलिस अधीक्षक अपराध/पुलिस अधीक्षक  काशीपुर तथा क्षेत्राधिकारी महोदय बाजपुर के कुशल पर्यवेक्षण मे तथा प्रभारी निरीक्षक गदरपुर के नेतृत्व में  दिनांक 08-04-2026 को गदरपुर पुलिस टीम  द्वारा सघन चैकिंग अभियान चलाया जा रहा था दौराने चैकिंग आनंद पब्लिक स्कूल से करीब 500 मी मकरंदपुर को जाने वाली नहर की पुलिया के पास महतोष मे एक व्यक्ति अभिजोत सिंह पुत्र सोनू सिंह निवासी मकरंदपुर गदरपुर संदिग्ध प्रतीत होने पर उपरोक्त को रोका गया व जामा तलाशी से  उक्त व्यक्ति के कब्जे से एक अदद तमन्चा 12 बोर व 01 अदद जिन्दा कारतूस 12 बोर बरामद किये गये। उक्त अभियुक्त को उसके जुर्म धारा 3/25 आयुध अधिनियम से अवगत कराते हुए हिरासत पुलिस किया गया।  गिरफ्तारशुदा अभियुक्त के विरुद्ध  बरामदगी माल के आधार पर मुकदमा एफआईआर नंबर 112/2026यू/एस 3/25 आयुध अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया । अभियुक्त को  माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जायेगा । अभियुक्त के आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। पकड़ने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय पाठक, उपनिरीक्षक मुकेश (प्रभारी चैकी महतोष), का. उमेश जोशी, कानि. कुन्दन सिंह शामिल थे।
 

खबरें

स्वास्थ्य टीम और प्रशासन की संयुक्त निरीक्षण कार्रवाई

रुद्रपुर (सू.वि.)। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. के. के. अग्रवाल के निर्देशों के अनुपालन में आज जनपद के रुद्रपुर ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की पी सी पी एन डी टी टीम ने एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सघन चेकिंग अभियान चलाया । 09 अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण, अवैध लिंग चयन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। निरीक्षण दल में प्रशासनिक और चिकित्सा विशेषज्ञों की इस संयुक्त टीम का नेतृत्व डॉ एस. पी. सिंह नोडल अधिकारी पी.एन.डी. टी. ओर प्रभारी नायब तहसीलदार राधे श्याम राणा के साथ राजस्व विभाग से लेखपाल अमित पांडे, सामाजिक क्षेत्र आई. एस.डी से  विशेषज्ञ बिंदु वासिनी , जिला समन्वयक प्रदीप महर  और अधिशासी सहायक गोपाल आर्य ने किया। टीम ने क्षेत्र के 09 प्रमुख अल्ट्रासाउंड और डायग्नोस्टिक केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित केंद्रों के अभिलेखों और कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच की गई-1. गौतम चिकित्सालय, 2. अहलावत अल्ट्रासाउंड सेंटर, 3. के.एम.सी. हॉस्पिटल,  4. चीमा हॉस्पिटल, 5. मेडिसिटी हॉस्पिटल, 6. छबड़ा आईवीएफ सेंटर, 7. एस.बी.आर. अल्ट्रासाउंड सेंटर, 8. श्रीराम नर्सिंग होम, 9. महाराजा अग्रसेन चिकत्सालय,
महाराजा अग्रसेन चिकत्सालय में 02 अल्ट्रासाउंड मशीन सील, महाराजा अग्रसेन चिकत्सालय में 02 अल्ट्रासाउंड मशीन थी जोकि रेडियोलॉजीस्ट के ना होने के कारण उपयोग में नहीं थी जिसको देखते हुए टीम द्वारा 02 अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया गया एवं निर्देश दिए गए की भविष्य में डॉक्टर के उपलब्ध होने पर ही पुन अनुमति प्रदान की जाएगी।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य और कार्यवाही
इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाना  और  प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना है। निरीक्षण के दौरान टीम ने फॉर्म-थ् का रख-रखाव, अभिलेखों का मिलान, और अनिवार्य सूचनाओं की जांच की।

गदरपुर पुलिस अवैध हथियार सहित एक को किया गिरफ्तार -एक तमंचा 12 बोर व एक कारतूस जिन्दा 12 बोर बरामद किया गया

(पुलिस एंड मीडिया गदरपुर)
गदरपुर।
पुलिस ने अवैध शस्त्र/हथियार रखने वालों के खिलाफ ऑप्रेशन प्रहार अभियान के तहत कठोर कार्यवाही करते हुए एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक तमन्चा 12 बोर व 01 जिन्दा कारतूस 12 बोर बरामद किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद उधम सिह नगर द्वारा वर्तमान में संदिग्ध व्यक्तियों व अवैध शस्त्र/हथियार रखने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही हेतु चलाये गये अभियान ऑपरेशन प्रहार के तहत दिशा निर्देश  दिये गये थे। उपरोक्त आदेश निर्देशों के क्रम में श्रीमान् पुलिस अधीक्षक अपराध/पुलिस अधीक्षक  काशीपुर तथा क्षेत्राधिकारी महोदय बाजपुर के कुशल पर्यवेक्षण मे तथा प्रभारी निरीक्षक गदरपुर के नेतृत्व में  दिनांक 08-04-2026 को गदरपुर पुलिस टीम  द्वारा सघन चैकिंग अभियान चलाया जा रहा था दौराने चैकिंग आनंद पब्लिक स्कूल से करीब 500 मी मकरंदपुर को जाने वाली नहर की पुलिया के पास महतोष मे एक व्यक्ति अभिजोत सिंह पुत्र सोनू सिंह निवासी मकरंदपुर गदरपुर संदिग्ध प्रतीत होने पर उपरोक्त को रोका गया व जामा तलाशी से  उक्त व्यक्ति के कब्जे से एक अदद तमन्चा 12 बोर व 01 अदद जिन्दा कारतूस 12 बोर बरामद किये गये। उक्त अभियुक्त को उसके जुर्म धारा 3/25 आयुध अधिनियम से अवगत कराते हुए हिरासत पुलिस किया गया।  गिरफ्तारशुदा अभियुक्त के विरुद्ध  बरामदगी माल के आधार पर मुकदमा एफआईआर नंबर 112/2026यू/एस 3/25 आयुध अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया । अभियुक्त को  माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जायेगा । अभियुक्त के आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। पकड़ने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय पाठक, उपनिरीक्षक मुकेश (प्रभारी चैकी महतोष), का. उमेश जोशी, कानि. कुन्दन सिंह शामिल थे।
 

पूर्व सैनिकों को मिला तोहफा सी एम ने किया सी एस डी कैंटीन व सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण -माननीय मुख्यमंत्री का रोड शो में किया जनता व जनप्रतिनिधियों ने न पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत -मुख्यमंत्री ने किया 60 वीरनारियों व 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित

खटीमा (सू0वि0)।माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सी एस डी कैंटीन खेतलसंडा मे सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्व0 सूबेदार श्री शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह मे बतौर मुख्यातिथि के रूप मे शिरकत की तथा 715.51 लाख की धनराशि से नवनिर्मित सी एस डी कैंटीन,162.26 लाख से निर्मित सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण किया। एनसीसी द्वारा बैंड द्वारा माननीय मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। कार्यक्रम मे सर्वप्रथम माननीय मुख्यमंत्री ने अपने पिता स्व0 सूबेदार श्री शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इसके उपरांत उन्होंने नैनीताल, ऊधम सिंह नगर व चम्पावत जिलों के शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया। माननीय मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिजनों,वीरनारियों को शॉल ओढ़ाकर एवं उपहार देकर सम्मानित किया। माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पिताजी स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सैनिक सम्मान समारोह में आये सभी वीर सैनिकों, वीरांगनाओं, सैन्य अधिकारियों और खटीमा क्षेत्र की जनता का स्वागत व अभिनंदन किया। उन्होंने  इस अवसर पर 60 वीर नारियों और 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज खटीमा में नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन एवं अत्याधुनिक सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण करने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर इस आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों, सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन के सभी स्वयंसेवकों और खटीमा क्षेत्र के मेरे समस्त भाई-बहनों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मेरे पूज्य पिताजी की पुण्य स्मृति में समर्पित इस समारोह का भावपूर्ण आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि 6 वर्ष पूर्व आज का ये दिन मेरे जीवन का सबसे पीड़ादायक और दुःखद दिन था, जब मैंने अपने प्रेरणास्रोत पूज्य पिताजी को खो दिया। उनके विचार, उनके सिद्धांत और उनका संघर्षपूर्ण जीवन आज भी हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करता है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्दी को देखकर मेरे मन में गर्व का भाव उत्पन्न होता था और साथ ही जिज्ञासा भी होती थी, क्योंकि पिताजी हमेशा अपनी वर्दी को बड़ा संभालकर और बड़े सलीके से रखते थे। उनका मानना था कि एक फौजी के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान होती है। और ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी होती है, देश की सेवा करने की जिम्मेदारी। उन्होंने मुझे राजनीति में आने से पहले ही ये समझा दिया था कि राजनीति कोई पद प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जनभावनाओं को समझकर उनके दुःख-दर्द में सहभागी बनने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं को समर्पित करने का माध्यम है। मेरे लिए वे जीवनभर अनुशासन, ईमानदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारी के प्रतीक रहे। श्री धामी ने कहा कि पिताजी ने मुझे सिखाया कि राष्ट्र सर्वोपरि है और बाकी सब उसके बाद आता है। उन्होंने कहा कि आज इतने वर्षों बाद भी जब मैं, पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो यह महसूस करता हूँ कि मैं जो कुछ भी कर पा रहा हूँ, उसमें पिताजी द्वारा दिए गए संस्कारों का ही सबसे बड़ा योगदान है।

माननीय मुख्यमंत्री ने बताया कि मेरे पिताजी ने 28 वर्षों तक सेना की महार रेजिमेंट में अपनी सेवाएं देते हुए, 1962 में हुए भारत चीन युद्ध, 1965 और 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के साथ ही ऑपरेशन ब्लूस्टार व ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपना अहम् योगदान दिया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है, कि वे किस प्रकार मुझे उन जवानों की देशभक्ति, पराक्रम और बलिदान की कहानियां सुनाया करते थे, जिन्होनें हँसते-हँसते देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। जिनको मैं बड़े ध्यान से सुनता था और वीरता की उन कथाओं को सुन कर मुझे ऐसा लगता था कि सेना में साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि महामानव होते हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं, सेना में तो नहीं हूं परंतु वीर सैनिकों को अपना आदर्श मानकर राष्ट्र सेवा में अपना यथासंभव योगदान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा हूं। एक सैनिक पुत्र होने के नाते, आज मुझे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों को देखकर अत्यंत गर्व की अनुभूति होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत को छोटे से छोटे रक्षा उपकरणों के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। आज ष्मेक इन इंडियाष् से ष्मेक फॉर द वर्ल्डष् तक की ये यात्रा हमारे सामर्थ्य और बढ़ती हुई शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, वो वर्ष 2024-25 में तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया है। इसी प्रकार, रक्षा निर्यात भी उल्लेखनीय वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो वर्ष 2014 के पहले 1 हजार करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, हथियार और अन्य रक्षा सामग्रियां उपलब्ध करा रहा है, जो इस बात का भी प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक रक्षा क्षेत्र में एक विश्वसनीय और मजबूत साझेदार बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आतंकवादियों ने पहलगाम में हमारी माताओं-बहनों की आंखों के सामने बेरहमी से उनके सुहागों को उजाड़ दिया, तब ऑपरेशन सिंदूर द्वारा हमने ना सिर्फ उनके सिंदूर का बदला लिया बल्कि आतंकवादियों और उनके अड्डों के खात्मे के साथ ही विश्व को भारत की मजबूत सैन्य शक्ति का परिचय भी दे दिया। आज हमारी राज्य सरकार भी आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में शहीदों, सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसमें चाहें शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 5 गुना तक बढ़ाना हो, आश्रितों को सरकारी नौकरी देना हो या पूर्व सैनिकों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना हो, हम हर स्तर पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेन्सन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अंलकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की है। हमने परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढाकर डेढ़ करोड़ रुपये करने का कार्य किया है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वीर बलिदानियों की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए हम देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण भी करा रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि हमनें बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का भी निर्णय लिया है और सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि को भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया है। हम प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था करने के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों हेतु 25 लाख रुपए मूल्य की स्थायी सम्पत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। यहाँ की पावन माटी में जन्मे वीर सपूतों ने माँ भारती के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं, एक सैनिक का पुत्र हूँ, मैं, सैनिक परिवारों के त्याग, संस्कार और संघर्ष को बहुत करीब से समझता हूँ। इसलिए मैं, आप सभी को ये विश्वास दिलाता हूँ, हमारी सरकार सैनिकों को राष्ट्र का सर्वोच्च नायक मानते हुए, उनके सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के अपने ष्विकल्प रहित संकल्पष् को पूर्ण करने के लिए इसी प्रकार निरंतर कार्य करती रहेगी। इस अवसर पर कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस सैनिक सम्मान समारोह में सैनिको एवं उनके परिजनों को सम्मानित करने का अवसर मिला है यह हमारे लिए सौभाग्य कि बात है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिको के परिजनों को सरकारी नौकरी, वीरांगनाओं के पेंशन बढ़ाने का काम धामी सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि 28 नदियों से जल व सैनिकों के घर से मिट्टी लेकर आज देहरादून में 5 वां धाम सैन्य धाम बनाया गया है। उन्होंने कहा बनबसा में सैनिक सामुदायिक भवन का निर्माण किया जायेगा। सांसद अजय भट्ट,कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़,दर्जा मंत्री विनय रुहेला ने भी संबोधित किया व स्वर्गीय  सूबेदार श्री शेर सिंह धामी जी नमन करते हुए  श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में श्रीमती विशना देवी, गीता धामी,मा0 कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, गणेश जोशी, राम सिंह कैड़ा,दर्जामंत्री विनय रोहेला,अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, फरजाना बेगम,हेमराज, ध्रुव रौतेला,विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा,विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य,जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मेयर विकास शर्मा,दीपक बाली,गजराज बिष्ट,नगर पालिका अध्यक्ष रमेश जोशी,प्रेम सिंह टूरना,ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा,पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता,जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, एसएसपी अजय गणपति, एसपी चम्पावत रेखा यादव, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसपी जितेन्द्र चैधरी, एएसपी डॉ उत्तम सिंह नेगी,पूर्व सैनिक अध्यक्ष गम्भीर सिंह धामी,भानी चंद सहित पूर्व सैनिक, गणमान्य आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जिले में खुले 10.60 लाख बैंक खाते

विनोद वार्ता संवाद-सूत्र
रुद्रपुर।
सरकारी वित्तीय योजनाओं का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचें। इसके लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में अब तक प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करीब 10.60 हजार बैंक खाते खोले जा चुके हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 90,500 से अधिक ऋण खाते खोले गए हैं जिससे छोटे उद्यमियों और युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली। बैंकिंग अधिकारियों के अनुसार जनधन खातों के माध्यम से लोगों को न सिर्फ बैंकिंग सुविधा मिली है बल्कि सरकारी योजनाओं की सब्सिडी और सहायता राशि सीधे खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचैलियों की भूमिका भी कम हुई है। मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के दिए जा रहे ऋण ने छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया है। किसानों के लिए भी विभिन्न योजनाएं लाभकारी साबित हो रही हैं। कृषि से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता, सब्सिडी और तकनीकी समर्थन मिल रहा है जिससे उनकी आय में सुधार हो। फसल उत्पादन से लेकर विपणन तक सरकार की पहल किसानों को मजबूती दे रही है। लीट बैंक मैनेजर चिराग पटेल ने कहा कि इन योजनाओं से नागरिकों, उद्यमियों और किसानों को एक मजबूत आर्थिक आधार मुहैया कराया जा रहा है।सरकार की प्राथमिकता हर व्यक्ति को बैंकिंग और आर्थिक योजनाओं से जोड़ना है। जनधन और मुद्रा योजना के माध्यम से लोगों को सीधे लाभ मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। आगे भी इन योजनाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। 


 

ऊधम सिंह नगर जिला प्रभारी मंत्री एवं उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा का पालिकाध्यक्ष के नेतृत्व में किया गया जोरदार स्वागत

(आकाश कोचर)
गदरपुर।
ऊधम सिंह नगर जिला प्रभारी मंत्री एवं उत्तराखण्ड के माननीय कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा का गदरपुर में  पालिकाध्यक्ष मनोज गुम्बर के नेतृत्व में शिष्टाचार भेंट कर उनका जोरदार स्वागत किया एवं हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की। इस अवसर पर नगर व क्षेत्र के विकास एवं जनहित से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर संक्षिप्त चर्चा भी की गयी। स्वागत करने वालों में सभासद परमजीत सिंह पम्मा, सन्नी बत्रा, सागर गंडा, आकाश कोचर सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे। 
 

पुलिस ने आबादी क्षेत्र में बिना लाइसेंस अवैध स्लॉटर हाउस चलाने पर 08 नफर अभियुक्तो को रंगे हाथ भैसों का वध करते किया गिरफ्तार किया है

(पुलिस एंड मीडिया गदरपुर)
गदरपुर।
पुलिस ने आबादी क्षेत्र में बिना लाइसेंस अवैध स्लॉटर हाउस चलाने पर गदरपुर पुलिस की बड़ी कार्यवाही करते हुए 08 नफर अभियुक्तो को रंगे हाथ भैसों का वध करते किया गिरफ्तार किया है।  पुलिस ने 05 जिन्दा भैसें व 60 किलो भैंस का मांस व मांस काटने के उपकरण बरामद किये है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद उधम सिंह नगर द्वारा थाना क्षेत्रअंतर्गत अवैध गतिविधियों की अपराधों की रोकथाम व अनावरण हेतु चलाए जा रहे अभियान के तहत कार्यवाही करते हुए श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय काशीपुर के निर्देशानुसार, क्षेत्राधिकारी महोदय बाजपुर के पर्यवेक्षण व प्रभारी निरीक्षक गदरपुर के नेतृत्व में मुखबिर की सूचना पर कोतवाली गदरपुर पुलिस टीम  द्वारा दिनांक 06/04/2026 की रात्रि इस्लामनगर लकड़ी की टाल के पास अवैध स्लॉटर हाउस चलाये जाने की सूचना प्राप्त होने पर  त्वरित कार्यवाही कर छापा मारते हुए इस्लामनगर लकड़ी की टाल के पास चार दिवारी के अन्दर खुले आँगन में 08 अभियुक्तगण को अवैध रूप से पशुओ ( भैंस ) का चाकू व छूरीयो से वध करते हुए घेर-घोट कर गिरफ्तार किया गया एवं इस प्रकार से जिंदा जानवरो को वध करने के बारे में जानकारी की गयी व स्लॉटर हाउस से सम्बन्धित लाईसेन्स तलब किया गया तो उपरोक्त मुल्जिमान लाईसेन्स दिखाने में कासिर रहे व बिना अनुमति उक्त अहाते को स्लॉटर हाउस के रूप में प्रयोग करते पाए गए। मुल्जिमान के कब्जे से मौके पर 60 किलो ग्राम मांस व 05 जिंदा भैंसे व अन्य मांस काटने के उपकरण बरामद किये गये। अभियुक्तगणो को मौके पर कारण  गिरफ्तारी बताकर हिरासत पुलिस लिया गया । बरामदा मांस की सही शिनाक्त हेतु मौके पर पशुचिकित्सक को पहचान हेतु बुलाया गया । चिकित्सक द्वारा मांस का निरीक्षण कर पहचान करने पर उक्त बरामद मांस भैंस का होना बताया गया । दाखिल बरामदा माल मुल्जिम के आधार पर थाना हाजा पर मु0अ0सं0 107/2026 धारा 325बीएनएस व 11(1)(1) पशुओ के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 पंजीकृत किया गया । मौके पर बरामदा 05 जिंदा भैंसो को पशुचिकित्साधिकारी के मौके पर आवश्यक कार्यवाही करते हुए, स्थानीय व्यक्ति के संरक्षण में विधिवत सुपुर्द किया गया।अभियुक्तगणो को माननीय न्यायालय पेश कर न्यायिक अभिरक्षया में उप कारागार हल्द्वानी भेज दिया गया है। पकड़ने वाली पुलिस टीम प्रभारी निरीक्षक संजय पाठक, उपनिरीक्षक मोहन बोहरा, संजय बोरा, कानि. निकुल जाटव, दिनेश बिष्ट, का. नवीन राम, का. राजेन्दर सिंह बिष्ट मौजूद थे। 


 

गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के 37वें दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की

पंतनगरर (सू0वि0)। गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के 37वें दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि0) ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महामहिम ने कहा कि दीक्षांत जैसे इस महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी समारोह में अपनी ऊर्जावान अमृत पीढ़ी से संवाद करने का अवसर प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है। उन्होंने इस अवसर पर अपने परिश्रम और समर्पण से यह सफलता अर्जित करने वाले सभी विद्यार्थियों को हृदय से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर केवल डिग्रियों के वितरण का नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के कृषि इतिहास, उसके संघर्ष, उसकी उपलब्धियों और उसके उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब हम अतीत की चुनौतियों से सीख लेते हुए वर्तमान की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं और एक सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु नए संकल्पों का निर्माण करते हैं। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय के सभी विद्वत शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं अभिभावकों को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन, परिश्रम और त्याग के कारण आज इन विद्यार्थियों ने गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। वास्तव में, किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके गुरुजनों और परिवार का अमूल्य योगदान होता है।महामहिम ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न को श्ब्रह्मश् कहा गया है। शास्त्रों में उल्लेख है- ष्अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्ष् अर्थात् अन्न का अधिकाधिक उत्पादन करना ही हमारा सर्वोच्च व्रत होना चाहिए। यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि अन्न केवल मानव जीवन का आधार नहीं है, बल्कि समस्त जीव-जगत के अस्तित्व की आधारशिला है। अन्न की समृद्धि ही किसी भी समाज को स्थिर, समृद्ध और सशक्त बनाती है। अतः कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानवता के संरक्षण और सभ्यता के निरंतर विकास का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज आप सभी अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति और विशेष रूप से कृषि एवं ग्रामीण भारत के समग्र विकास के प्रति जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आज से आपका प्रत्येक निर्णय, आपका प्रत्येक प्रयास और आपकी प्रत्येक उपलब्धि न केवल आपके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करेगी, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह क्षण आपके जीवन का एक निर्णायक मोड़ है।महामहिम ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि जब भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की, तब देश की कृषि स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। खाद्यान्न की भारी कमी, सीमित उत्पादन क्षमता और आयात पर निर्भरता ने देश को ष्ैीपच-जव-डवनजी म्बवदवउलष् की स्थिति में ला खड़ा किया था। पारंपरिक खेती, सीमित सिंचाई संसाधन, उन्नत बीजों और आधुनिक तकनीकों का अभाव - ये सभी हमारी कृषि प्रगति में बड़ी बाधाएं थे। उस समय सबसे बड़ी चुनौती थी- देश के प्रत्येक नागरिक तक भोजन सुनिश्चित करना। ऐसी विषम परिस्थितियों में पंतनगर विश्वविद्यालय की स्थापना एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय सिद्ध हुई। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय कृषि परिवर्तन का एक सशक्त केंद्र बना, एक ऐसा आंदोलन जिसने देश की कृषि को नई दिशा, नई ऊर्जा और नई पहचान प्रदान की।

महामहिम ने कहा कि 1960 और 1970 के दशक में आई हरित क्रांति में इस विश्वविद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यहाँ के वैज्ञानिकों, शिक्षकों और छात्रों के सामूहिक प्रयासों ने गेहूँ और धान के उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि सुनिश्चित की। उच्च उत्पादकता वाली किस्मों का विकास, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और वैज्ञानिक सोच का समावेश- इन सभी प्रयासों ने भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया। उन्होंने कहा कि आज हम गर्व से कह सकते हैं कि भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक सशक्त कृषि शक्ति के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने ष्ैममक जव च्संजमष् की अवधारणा को साकार करते हुए गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और उनके व्यापक प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई है। यहाँ से शिक्षित होकर निकले विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने कहा कि आज देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में पंतनगर के पूर्व छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, यह इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता का प्रमाण है। महामहिम ने कहा कि आज की सदी तकनीक और नवाचार की सदी है। कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, प्रिसिजन फार्मिंग, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ये सभी आधुनिक कृषि के नवीन आयाम हैं। उन्होंने कहा कि अब समय की मांग है कि हम पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय करते हुए ष्स्मार्ट एग्रीकल्चरष् की दिशा में आगे बढ़ें। इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि कृषि अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भी बनेगी। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आग्रह करते हुए कहा कि खुली आँखों से बड़े सपने देखें। ऐसे सपने देखें जो आपको चैन से बैठने न दें, जो आपको निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। छोटे लक्ष्य केवल सीमित उपलब्धियों तक ले जाते हैं, जबकि बड़े सपने व्यक्ति को असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं। आपके सपनों में केवल आपका भविष्य नहीं, बल्कि भारत का भविष्य भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। महामहिम ने कहा कि उत्तराखण्ड के में कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। पर्वतीय कृषि, जैविक खेती, औषधीय पौधों का उत्पादन, मिलेट्स (श्री अन्न), बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलें, ये सभी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने के सशक्त माध्यम बन सकते हैं। सेब, कीवी, ड्रेगन फ्रूट, सब्जियाँ एवं पुष्प उत्पादन जैसी गतिविधियाँ राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती हैं। यदि इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बाजार उन्मुख सोच अपनाई जाए, तो उत्तराखण्ड कृषि के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि पशुपालन- डेयरी, पोल्ट्री और बकरी पालन छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का स्थायी और भरोसेमंद स्रोत बन सकते हैं। इन क्षेत्रों में तकनीकी प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है और किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज का नया भारत ष्विकसित भारत 2047ष् के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब हमारा लक्ष्य केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें वैश्विक कृषि बाजार में अग्रणी स्थान प्राप्त करना है। निर्यात, मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता, ये तीनों क्षेत्र हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। महामहिम ने विद्यार्थियों से कहा कि आपकी यह डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा दायित्व है, जो आपको समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी ही नहीं, बल्कि उत्तरदायी नेतृत्वकर्ता बनाता है। इसलिए एक अनुशासित, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन शैली अपनाना ही आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा करते हुए कहा कि आप केवल श्जॉब सीकर्सश् नहीं, बल्कि श्जॉब प्रोवाइडर्सश् बनने का संकल्प लें। कृषि आधारित स्टार्टअप्स, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से आप न केवल अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि समाज में रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं। यही सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा है। उन्होंने कहा कि आज के इस अवसर पर मैं हमारे आदरणीय शिक्षकों को विशेष रूप से नमन करता हूँ। गुरु केवल ज्ञान के प्रदाता नहीं होते, वे चरित्र के निर्माता होते हैं। एक शिक्षक ही वह शक्ति है, जो एक साधारण विद्यार्थी को असाधारण व्यक्तित्व में परिवर्तित करता है। आप सभी शिक्षक राष्ट्र निर्माण के वास्तविक शिल्पकार हैं, आपके द्वारा दी गई शिक्षा ही भविष्य के भारत की दिशा निर्धारित करती है। महामहिम ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी का यह दायित्व है कि अपने ज्ञान, कौशल और संसाधनों का उपयोग केवल अपनी प्रगति तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित करें। जब आपका ज्ञान जनकल्याण से जुड़ता है, तभी वह सच्चे अर्थों में सार्थक बनता है। उन्होंने कहा कि ष्राष्ट्र प्रथम-राष्ट्र सर्वोपरिष् का भाव ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को सामान्य से असाधारण बनाती है। यही भाव आपको कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनाकर एक ऐसे जीवन की ओर अग्रसर करता है, जो केवल सफल ही नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण, प्रेरणादायी और यशस्वी भी हो। उन्होंने कहा कि आप केवल अपने भविष्य के निर्माता नहीं हैं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार हैं। आपका परिश्रम, आपकी निष्ठा और आपका संकल्प ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएगा। याद रखिए! आपकी सफलता का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह राष्ट्र के उत्थान में योगदान दें। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की एवं मेरी शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि आज का यह पावन अवसर हम सभी के लिए गर्व और गौरव का क्षण है। पंतनगर विश्वविद्यालय का यह 37वाँ दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की कृषि चेतना, नवाचार और आत्मनिर्भरता की परंपरा का उत्सव है। मैं इस अवसर पर उन सभी विद्यार्थियों को हृदय से बधाई देता हूँ जिन्होंने वर्षों की साधना, अनुशासन और परिश्रम से यह सफलता अर्जित की है। आप सभी न केवल इस विश्वविद्यालय के गौरव हैं, बल्कि उत्तराखण्ड और भारत की कृषि का भविष्य भी हैं।उन्होंने कहा कि पंतनगर की यह भूमि भारत की हरित कांति की जन्म स्थली रही है। यहाँ के वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने देश की कृषि को नई दिशा देने का जो कार्य किया है, वह अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। पंतनगर से विकसित की गई अनेक फसल किस्में, जैसे पंत धान, पंत गेहूँ, पंत मक्का, पंत सरसों, पंत सोयाबीन आज भी देश के किसानों के विश्वास का प्रतीक हैं। इस विश्वविद्यालय में लैब टू लैंड की भावना को साकार कर दिखाया है, अर्थात प्रयोगशालाओं से निकला ज्ञान सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचे, और यही इस संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। माननीय मंत्री ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा की राज्य सरकार पर्वतीय कृषि की विशिष्टता को संरक्षित और सवंर्धित करने के लिए विषेश प्रयास कर रही है। मोटे अनाज, जिन्हें हम मिलेट्स कहते हैं, आज पोषण और पर्यावरण दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्तरखण्ड में रागी, झंगोरा, कोदो और चिनो जैसी फसलें जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील हैं। इस वर्ष रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य रू. 4886ध्- प्रति कुंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा और प्रेरणा दोनों मिल रही हैं। हमारा प्रयास है कि ये पोषक अनाज राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और विद्यालयी भोजन योजना में सम्मिलित हों, ताकि किसानों को बाजार और समाज को पोषण दोनों प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय का योगदान कृषि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ नैनो उर्वरक विकास, मृदा कार्बन संचयन, जैव उर्वरक तकनीक और स्मार्ट सिंचाई प्रणाली पर हो रहे कार्यों से राज्य और देश को नई दिशा मिल रही है। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान का पुल बने हुए हैं, जो किसानों को समयानुकूल तकनीक, प्रशिक्षण और सलाह प्रदान कर रहे हैं।

इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह उन वर्षों की कठिन साधना, परिश्रम और समर्पण का उत्सव है, जो हमारे युवा विद्यार्थियों ने अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंचने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि पन्तनगर विश्वविद्यालय का नाम केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अत्यन्त सम्मान के साथ लिया जाता है। यह भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय है, जिसने हरित क्रांति की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी के बाद खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था, तब इस विश्वविद्यालय ने उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि भारत न केवल खाद्यान्न में आत्मनिर्भर है, बल्कि कई कृषि उत्पादों में निर्यातक भी बन चुका है और इस उपलब्धि में पन्तनगर का योगदान अविस्मरणीय है। आज हम जिस स्थिति में हैं, वहां पहुंचने के लिए हमारे वैज्ञानिकों, किसानों और संस्थानों ने अथक परिश्रम किया है। 

माननीय सांसद ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल किस्में विकसित की, जल संरक्षण तकनीकों पर कार्य किया, किसानों को प्रशिक्षण और विस्तार सेवाएं प्रदान की और यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया। मुझे पूरा विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय उत्तराखण्ड को कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन में मॉडल राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। उन्होंने कहा कि आज देश आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसमें कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। किसानों की आय दोगुनी करना, कृषि को लाभकारी बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमारे युवा कृषि स्नातकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का दिन आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। आपने ज्ञान अर्जित किया है, अब समय है उसे समाज के हित में उपयोग करने का। आप नवाचार को अपनाएं, किसानों के साथ जुड़ें, स्टार्टअप और एग्री-उद्यमिता की ओर बढ़ें एवं गांवों के विकास में योगदान दें। आप केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। याद रखिए आपकी शिक्षा तथी सार्थक है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि पन्तनगर विश्वविद्यालय ने हमें एक मजबूत आधार दिया है, उत्तराखण्ड हमें अपार संभावनाएं देता है, और हमारे युवा हमें एक उज्जवल भविष्य की आशा देते हैं।

इस अवसर पर कुलपति डॉ मनमोहन सिंह चैहान ने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में 1384 विद्यार्थियों को को उपाधि प्रदान की गई, जिसमें 721 छात्र और 664 छात्राएं शामिल थे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा आम की नई किस्म तैयार की गई है जिसका नाम सिंदूर ऑपरेशन से प्रेरित होकर सिंदूर ही रखा गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के द्वारा किये गए कार्यों एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए विश्वविद्यालय के उपलब्धियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर विधायक लालकुआं मोहन सिंह बिष्ट, कुलसाचिव दीपा विनय, कुलपति डी एस रावत, नवीन चंद्र लोहनी, डॉ तृप्ता ठाकुर, जगत सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, अपर जिलाधिकारी कौशत्युभ मिश्र, एएसपी उत्तम सिंह नेगी सहित विश्वविद्यालय के अधिष्ठातागण, छात्र छात्राएं आदि उपस्थित थे।