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  • 12:49 pm | 14 December, 2019 | Saturday

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उत्तराखण्डविविध

हवा में लटका महतोष मोड़ से नवाबगंज की सड़क का मामला - मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक ने की थी हवार्इ घोषणाएं - शासन से वर्तमान तक नहीं की गई है कोई वित्तीय स्वीकृति -पदम श्री वैद्य बालेंदु प्रकाश ने सूचना के अधिकार आधिनियम 2005 के तहत मांगी थी जानकारी

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- वैद्य बालेंदु शीघ्र करेंगे एक जनहित याचिका दायर

गदरपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पर स्थित महतोष मोड़ से रतनपुरा-नवाबगंज होते हुए उत्तर प्रदेश जाने वाला करीब चार किमी मोटर मार्ग कई वर्षो से खस्ता हाल में है। जिस पर आए दिन वाहनों की टूट-पफूट तथा दुर्घटनाएं होती रहती थी। स्थानीय निवासियों के बार बार आग्रह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट तथा इस क्षेत्र के विधायक राजकुमार ठुकराल तथा मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद जिला मुख्यालय से मात्र करीब 12 किमी. दूर सड़क का हाल बेहाल है। इस क्षेत्र में पैंक्रीयटायटिस रोग की चिकित्सा के लिए विशिष्ट चिकित्सा केंद्र स्थापित करने वाले अंतरराष्टींय ख्याति प्राप्त पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश ने स्थानीय निवासियों के साथ सड़क निर्माण का लेकर  26 जनवरी को सत्याग्रह किया था। आन्दोलन को देख शासन व प्रशासन ने आनन-फानन में लोक निर्माण विभाग को आदेश दे गड्डा भरने का काम शुरू कर दिया। इसी बीच वैद्य बालेंदु ने लोक निर्माण विभाग तथा शासन से सूचना के अधिकार आधिनियम के तहत इस संबंध में कर्इ जानकारी मांगी थी। इससे कर्इ बातें खुलकर सामने आयी। जिसमें लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, हल्द्वानी द्वारा 30 जुलार्इ 2018 को उक्त सड़क के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिये नौ करोड़ साठ लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। कुछ महीने पहले किच्छा की एक सभा में स्थानीय विधयक के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने इस सड़क के निर्माण की घोषणा की थी। यहां तक कि स्थानीय विधयक राजकुमार ठुकराल ने प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के पूर्व जन सभा में पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश द्वारा किए गये सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर करने की कोशिश की थी। जिससे मुख्यमंत्री नाराज हुए और विधायक ने अपना संबोधन बीच में ही रोक दिया था। परंतु उत्तराखंड शासन लोक निर्माण अनुभाग 2 में कार्यरत अनुभाग एवं लोक निर्माण अधिकारी प्रदीप कुमार द्वारर 15 फरवरी 2019 के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चार किमी. लंबे मार्ग जिसकी लागत 960.16 लाख है का प्रस्ताव शासन में लंबित है। जिस पर वर्तमान तक कोर्इ वित्तीय स्वीकृति नहीं प्रदान की गर्इ है। पत्र में यह भी बताया गया है कि सड़कों का निर्माण उच्चअधिकारियों की स्वीकृति पर ही निर्भर है। पत्र के द्वारा परामर्श दिया गया है कि वैद्य बालेंदु प्रकाश संबंधित विधान सभा क्षेत्र के माननीय विधायक से अनुरोध कर उनकी प्राथमिकता में उक्त कार्य को स्वीकृति हेतु सम्मिलित करा सकते हैं। वैद्य बालेंदु प्रकाश ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुए इस पत्र पर रोष प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण हेतु उच्चा​धिकारिओ व नेताओं की सिफारिशों की जगह स्थानीय जनता की आवाज को तवज्जो दी जानी चाहिए। क्या मुख्यमंत्री एवं विधायक की घोषणा के बाद भी आम जनता को विधायक के पास सड़क निर्माण प्रस्ताव की संस्तुति कराना जरूरी है।  उन्होंने कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है कि क्षेत्र के विधायक और स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री भोली-भाली जनता को अपनी लुभावनी घोषणाओं से यदा-कदा गुमराह करते हैं, जबकि लोक निर्माण के प्रभारी सचिव द्वारा हस्ताक्षित दिनांक 11 मार्च 2017 के शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि 30 अप्रैल 2017 तक राज्य के समस्त राजमागोर्ं तथा संपर्क मार्गो को पैचलैस करने का गुणवत्ता युक्त कार्य किया जाए। आदेश में स्पष्ट है कि यदि यह कार्य 30 मार्च 2017 तक पूरा नहीं होता है तो संबंधित अधीक्षण अभियंता एवं अन्य अधिकारी इसके लिए उत्तरदार्इ होंगे संज्ञान लें कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत अच्छी सड़क नागरिकों का मूलभूत अधिकार है। इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखंड का आदेश भी स्पष्ट है। वैद्य बालेंदु ने कहा कि संविधान का पालन कर जनता को सड़क, सुरक्षा, स्वास्थ्य आदि सुविधएं दिलाना राज्य सरकार का सामाजिक दायित्व है। यह अत्यंत हास्यास्पद है कि राज्य सरकार, मंत्रियों और अधिकारियों के वेतनभत्तों एवं यात्राओं, बैठकों के लिए वित्तीय साधन जुटा लेती है, किंतु जब नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की बात आती है तो वित्तीय संसाधनों की कमी का बहाना बनाती है। राज्य के लोक निर्माण विभाग द्वारा अपने संवैधनिक कर्तव्यों का संपादन करने में अक्षम होने के कारण वैद्य बालेंदु प्रकाश ने राज्य के लोक निर्माण मंत्री (मुख्यमंत्री) को पत्र लिखकर राज्य की सभी सड़कों को गड्डा मुक्त करने की मांग की है तथा उन सभी शीर्ष अधिकारियों, जिनके रहते सड़कों में गड्डे पाए गये हैं यानिम्न गुणवत्ता का काम हुआ है, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये। इस पत्र की प्रतिलिपि वैद्य बालेंदु प्रकाश ने माननीय मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय उत्तराखंड को भी भेजा है। राज्य सरकार द्वारा 15 दिनों के अंतर्गत उचित कार्यवाही न होने पर वैद्य बालेंदु एक जनहित याचिका दायर करने पर विचार कर रहे है।

 

खबरें

नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं मिष्ठान वितरण किया

सुरेन्द्र चावला उर्फ राजू
गदरपुर। लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं मिष्ठान वितरण कर हर्ष व्यक्त किया। नवनियुक्त भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष चंकित हुड़िया के नेतृत्व मे दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता गूलरभोज रोड तिराहे पर एकत्र हुए। यहां पर कार्यकर्ताओं ने मिष्ठान वितरण करते हुए खुशी जाहिर की। इस दौरान हुड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नागरिकता संशोधन बिल पास करवाकर देशवासियों का सम्मान बढ़ाया है। इस मौके पर व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज सेतिया, मनीष फुटेला, नरेश हुड़िया, राजेश गूम्बर, बंटी गुप्ता, सचिन गुप्ता, संतोष श्रीवास्तव, रोहित सुदामा, हरबंस लाल छाबड़ा, प्रेमपाल, विजय बठला, अजय, सतीश मिढ्डा सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।  


 

गांव मे मवेशियों के मरने से मचा हड़कंप -अचानक ठंड पड़ने से भी बीमार हो सकते है पशु

गदरपुर। ग्राम मजराविधि में अचानक तीन मवेशियों के अचानक मरने से हड़कंप मच गया। मवेशी मालिकों का कहना था कि मवेशी किसी भयंकर बीमारी के चलते मरे है। ग्राम मजराविधी मे त्रिलोक सिंह, मदन सिंह एवं बहादुर के तीन मवेशियों की अलग अलग दिनों अचानक मौत हो गई। आये दिन मवेशियो की हो रही मौत से ग्रामीणो मे हड़कंप मच हुआ है। ग्रामीणो का कहना था कि उनकी दुधारू भैसो के मरने से उन्हे 1.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। ग्राम प्रधान राजबाला ने इसकी सूचना पशु चिकित्सक रवि शंकर झां को दी। सूचना पर पशु चिकित्सक मौके पर पहुचें और मरे हुए मवेशी की जांच की। इस संबंध मे जब पशु चिकित्सक डा. झा से बात कर गई तो उनका कहना था कि पशुओं की मौत ठंड से हो सकती है। उन्होने कहा कि इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने पशु पालकों को अपने मवेशियों को ठंड से बचाने की सलाह दी।

अपर जिलाधिकारी नजूल के उत्पीड़न से समस्त राजस्व कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया धरना -मुख्य सचिव देहरादून को पत्र भेजकर जनपद से बाहर स्थानान्तरण किये जाने की मांग की -स्थानान्तरण न होने तक कार्य बहिष्कार पर रहने का किया ऐलान

गदरपुर। अपर जिलाधिकारी के उत्पीड़न से त्रस्त होकर कलेक्ट्रेट कर्मचारियों के समर्थन गदरपुर तहसील कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर कार्यबहिष्कार कर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने मुख्य सचिव देहरादून उत्तराखंड को पत्र भेज कार्यवाही की मांग की। मुख्य सचिव को भेजे गये पत्र में कहा गया कि जनपद ऊधम सिंह नगर के समस्त राजस्व कर्मचारी अपर जिलाधिकारी नजूल जगदीश चन्द्र के उत्पीड़न से त्रस्त होकर कार्य बहिष्कार कर रहे है। उनका आरोप है कि उक्त अधिकारी द्वारा बिना कारण के कर्मचारियों को वेतन रोकना और उनके विरुद्ध कार्यवाही करना तथा प्रशासनिक अधिकारी को रीडर/पेशकार के पद पर  कार्य करवाया जा रहा है। साथ ही अपने ढंग से कलेक्ट्रेट का पुर्नगठन कर जूनियर कर्मचारियों को सीनियर पद पर कार्य कराया जा रहा है। तथा सीनियर कर्मचारी को जूनियर पदों पर कार्य कराया जा रहा है तथा सीनियर कर्मचारियों को जूनियर पदों पर  तहसील एवं परगनों में कार्य करवाया जा रहा है। जिससे कलेक्ट्रेट कर्मचारी क्षुब्ध है। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उक्त अधिकारी का स्थानान्तरण इस जनपद से बाहर नही किया जाता तब तक समस्त राजस्व कर्मचारी कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन करने वालों में पेशकार गिरीश चन्द्र मोर्या, लेखाकार सुरेन्द्र कुमार शुक्ला, मनीष कुमार, मोहम्मद उमर आदि कर्मचारी मौजूद थे। 
 

राजरानी कन्या इण्टर कालेज की छात्राओं ने निकाली अक्षय ऊर्जा संरक्षण रैली

सुरेन्द्र चावला उर्फ़ राजू

गदरपुर। भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ ऊर्जा की आवश्यकता भी बढ़ती है। जिसको ध्यान में रखकर देश के अन्दर ऊर्जा संरक्षण को जागरुक करने के लिए राजरानी कन्या इण्टर कालेज की स्वयं सेविकाओं द्वारा रैली निकाली निकाल जनमानस को जागरुक किया गया। इस दौरान गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। ऊर्जा संरक्षण विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्या सरोज अरोरा ने कहा जिस गति से ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ रही है उसे देखते हुए ऊर्जा के समस्त संसाधन नष्ट होने की आशंका बढ़ रही है, आवश्यकता है कि हम ऊर्जा की ओर विशेष ध्यान दें। कार्यक्रम अधिकारी एनएसएस केवल अरोरा ने ऊर्जा के परमपरागत और गैर परम्परागत विस्तार से चर्चा करते हुए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। रैली विद्यालय से प्रारम्भ होकर अनाज मंडी, पंजाबी कालोनी, पुनयानी गली, मेन रोड से होते हुए विद्यालय में सम्पंन हुई। रैली में छात्राओं द्वारा लोगों को स्लोनों द्वारा जागरुक किया गया। इस मौके पर  उमा रतूड़ी, संदीप चैहान, विनोद राजपूत, रवि चैहान, संजीव चैहान, अशोक चन्द, बसंती, शहनाज, ज्योति, मनोज कुमार, प्रिंयका, सिमरन आदि मौजूद थे। 
 

सभासद गूम्बर सहित वार्डवासियों ने नगर में अलाव जलाने की मांग की

गदरपुर। बढ़ती ठंड के चलते चल रही शीत लहर से लोगों में कपकपी बढ़ गयी है। जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। ठंड के चलते लोग आग का सहारा लेकर कपकपी दूर कर रहे है। ठंड के चलते वार्ड नंबर 6 के सभासद मनोज गूम्बर एवं समस्त वार्डवासियों ने अधिशासी अधिकारी को पत्र देकर नगर के समस्त वार्डों में अलाव जलवाने की मांग की है। जिससे गरीब लोगों ठंड से राहत मिल सके।

यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाने के लिए गदरपुर में एक बार फिर सीपीयू पहुंची -पहले दिन 85 चालान काट 50 हजार रुपये आर्थिक दण्ड के रुप में वसूला -नाबालिकों को वाहन न देने के लिए अभिभावकों से किया आग्रह

गदरपुर। बढ़ते यातायात के चलते एवं यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा गदरपुर क्षेत्र में सीपीयू का आगमन कराया गया। जिससे बिना हेलमेट के दो पहिया वाहन चलाने वाले और चार पहिया वाहन में बिना सीट बेल्ट के चलने वाले लोगों का चालान कर यातायात नियमों का पालन करने की हिदायद दी गयी। नगर में विगत माह से सीपीयू के यहां से चले जाने के बाद नगर व क्षेत्र में यातायात नियम का लोगों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा था। यहां तक कि लोग अपने छोट बच्चों को भी वाहन चलाने से नहीं रोक पा रहे है साथ ही साथ हैलमेट के बिना, तीन सवारियां बैठने, कुछ शराती युवाओं द्वारा बाइक मंें तेज आवाज वाला सेलेंसर लगाकर वाहन चलाना आम बात हो गयी थी। जबकि स्थानीय पुलिस द्वारा भी चैकिंग अभियान के बाद भी लोग यातायात के नियमों को पालन नहीं कर पा रहे है। जिसके चलते पुनः गदरपुर क्षेत्र में सीपीयू द्वारा वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। जिसके तहत एस आई गोविंद सिंह मनकोटी एवं एसआई सतपाल पटवाल की अलग-अलग दो टीमें नगर में चालान काटे गये। जिससे बिना हेलमेट पहनकर वाहन वाले दोपहिया वाहनों के जमकर चालान हुए और नगर में सीपीयू के नाम का हड़कंप मचा रहा। वही सीपीयू की दोनों टीमों द्वारा नगर के दोनों छोर पर पहले दिन 85 चालान किए गये। साथ ही एक दोपहिया वाहन सीज किया गया। जानकारी के अनुसार 85 चालानोेें में से 10 चालान न्यायालय संबंधित एवं 10 चालान पुलिस एक्ट के किए गये। सीपीयू टीम द्वारा चालान प्रक्रिया कर लगभग करीब 50 हजार की धनराशि एकत्रित की गयी। एसआई गोविंद सिंह मनकोटी एवं सतपाल पटवाल ने बताया कि  समय-समय पर सीपीयू नगर में आती रहेंगी और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने नाबालिक वाहन चलाने वाले अभिभावकों से आग्रह किया है कि वह उन्हें वाहन चलाने न दें यदि चेकिंग के दौरान पकड़े गये तो यातायात नियमों के तहत कार्यवाही की जायेगी। 
 

संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने पर बोले पीएम मोदी भारत के लिए ऐतिहासिक दिन

नई दिल्ली। बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल के पास होना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया और इसे भारत के इतिहास में मील का पत्थर बताया। पीएम मोदी ने ट्वीट  करते हुए कहा कि भारत के लिए और हमारे देश की करुणा और भाईचारे की भावना के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन है। खुश हूं कि सीएबी 2019 राज्यसभा में पास हो गया है। बिल के पक्ष में वोट देने वाले सभी सांसदों का आभार। ये बिल बहुत सारे लोगों को वर्षों से चली आ रही उनकी यातना से निजात दिलाएगा।
 

मो. आलम ने भी पालिका के प्रस्तावित स्लाटर हाऊस न बनाने की बात कही

सुरेन्द्र चावला उर्फ़ राजू
गदरपुर। नगरपालिका परिषद द्वारा प्रस्तावित स्लाटर हाऊस का विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध किया गया है। इस समबंध में जिला कार्य योजना समिति के पूर्व सदस्य मो. आलम ने भी विरोध को उचित बताते हुए कहा कि पालिका प्रशासन द्वारा नये स्लाटर हाऊस का निर्माण न करवा पुराने स्लाटर हाऊस का जीर्णोधार किया जाये जो वर्षों से बना हुआ है। इस पर किसी का भी कोई विरोध नहीं होगा। इससे नगरपालिका के पैसे का भी सदपयोग होगा।
 

अहिप ने भी आबादी क्षेत्र मे स्लास्टर हाउस खोले जाने का किया कड़ा विरोध -एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री ने नाम भेजा ज्ञापन

सुरेन्द्र चावला उर्फ राजू
गदरपुर। नगरपालिका परिषद द्वारा प्रस्तावित स्लास्टर हाऊस (बूचड़खाना) खोले जाने का विरोध मुखर होने लगा है। अब अहिप कार्यकर्ता ने भी कड़ा विरोध जताया। अहिप के प्रान्त अध्यक्ष के नेतृत्व मे दर्जनो लोगों ने तहसील मे पहुंच कर उपजिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा। सौपे गये ज्ञापन में आबादी क्षेत्र मे स्लास्टर हाउस खोले जाने के कड़े विरोध करते हुए प्रस्तावित जगह पर बनाने को निरस्त करने की बात कही है। अखिल भारतीय हिन्दु परिषद के प्रान्तीय अध्यक्ष डा. आरके महाजन के नेतृत्व में के दर्जनो कार्यकर्ता तहसील पहुंचे। उन्होने वार्ड नबरं 11 में नगरपालिका द्वारा प्रस्तावित स्लास्टर हाऊस खोले जाने का कड़ा विरोध प्रकट करते हुए प्रदर्शन किया। इसके उपरान्त उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति मे नाजिर मो0 उमर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा। सौंपे गये ज्ञापन मे कहा गया कि खटीमा, गदरपुर, बाजपुर, किलाखेड़ा मे जहां बूचड़खाने खोले जाने का प्रस्ताव है वह आबादी क्षेत्र है। अहिप के प्रान्तीय अध्यक्ष डा. आरके महाजन ने कहा कि बूचड़खाने आबादी क्षेत्र मे खोले जाने का कड़ा विरोध किया जायेगा। इससे आम लोगों को तो परेशानी होगी। इसके अलावा पर्यावरण के संरक्षण मे बाधा उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि लोगों की भावनाआंे का सम्मान करते हुए बूचड़खानो को उक्त स्थान पर न खोला जायें। ज्ञापन में कहा कि अगर प्रशासन द्वारा जबरदस्ती बूचड़खाने खोले गये तो तहसील मे धरना प्रदर्शन किया जायेगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। ज्ञापन देने वालों में  अमित ढींगड़ा, गुरमेल सिंह, राजेन्द सिंह, अरूण सिंह, अनुज सिंह, शिवा सिंह, कमल कुमार, भीम सिंह, पंकज कुमार, विशाल, सोरभ, कश्यप, विपुल प्रजापति, निशांत सिंघल, निपुन गगनेजा सहित काफी संख्या मे कार्यकर्ता मौजूद थे। मो. उमर ने बताया कि दिये गये ज्ञापन के जिलाधिकारी महोदय को भेज दिया गया है।

अजब गजब: भर्ती किया उप प्रधानाचार्य के लिए बना दिया उप शिक्षाधिकारी 

उमेश पाण्डेय
सितारगंज। राजकीय इंटर कालेजों में उप प्रधानाचार्य व डाइट में वरिष्ठ प्रवक्ता के लिए चयन के बाद नियम के विरूद्ध उप शिक्षा अधिकारी के पदों पर नियुक्ति देने का मामला अब तूल पकड़ने लगा हैं। नानकमत्ता के विधायक डा.प्रेम सिंह राणा के इस मामले को नियम 300 के तहत विधानसभा में उठाये जाने के बाद से उप शिक्षाधिकारी के पद पर तलवार लटक गई हैं। 
दरअसल यह मामला करीब एक साल से चर्चा में हैं। बताया जाता है कि 30 जून 2008 को ​माध्यमिक शिक्षा अनुभाग के तत्कालीन शिक्षा सचिव ने लोक सेवा आयोग को उप प्रधानाचार्य एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उत्तराखंड सम्मिलित राज्य  सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 के लिए 11 मार्च 2011 को 91 पदों के लिए भर्ती निकाली। इसमें राजकीय इंटर कालेज, राजकीय बालिका इंटर कालेजों में उप प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में वरिष्ठ प्रवक्ता, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में वरिष्ठ प्रवक्ता, सहायक निदेशक व विधि अधिकारी, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद मेंं उप सचिव तथा स्टाफ आफीसर के पद शामिल थे। परीक्षा के बाद 84 अभ्य​र्थी चयनित किये गये। बताया जाता है 21 मार्च 2015 को माध्यमिक शिक्षा अनुभाग ने लोक सेवा आयोग को लिखे पत्र में बताया कि उप प्रधानाचार्य के पद पर चयनित अभ्यर्थियों को राज्यपाल की तरफ से कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से उत्तराखंड राज्य शैक्षिक सेवा (प्रशासनिक संवर्ग) के अंतर्गत उप शिक्षाधिकारी व समकक्ष पदों पर अस्थाई रूप से नियुक्त करते हुये दो साल की परिवीक्षा अवधि पर रखे जाने की स्वीकृ​ति मिली है। इसके बाद 4 जून 2015 को उन्हें प्रशिक्षण के बाद नियुक्ति दे दी गई। यह कार्यवाही प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई। इस मामले में मजेदार बात यह है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उप शिक्षाधिकारी का पद कहीं अस्तित्व में ही नहीं आया था। अब इस मामले में शिकायत करने वालों का कहना है कि यह सेवा नियमावली का उल्लंघन है। 
नियमों के विरूद्ध की गई ​इन नियुक्तियों को लेकर विभिन्न संगठन करीब एक वर्ष से मुखर हैं। अब नानकमत्ता के विधायक डा. प्रेम सिंह राणा ने भी नियम 300 के तहत इस मामले को विधानसभा में उठाते हुये सदन से सूचना मांगी है। इसके बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया हैं। अब सरकार को इसका जवाब देना हैं। पिछले पांच साल से विवादित चल रहे इस मामले को बेरोजगारों के साथ धोखा बताया जा रहा है। शिकायत करने वालों का तर्क है कि यदि तभी उप शिक्षाधिकारी पद के लिए भी अधियाचन किया जाता तो बेरोजगार आवेदन कर सकते थे।